सौभरि ब्राह्मणों की मातृभाषा *ब्रजभाषा* है । इसके अतिरिक्त संस्कृत, हिंदी, राजस्थानी, बुंदेलखंडी, अवधी, मराठी, इंग्लिश ।
ब्रजभाषा के मातृभाषा होने का सबसे बड़ा कारण है सौभरि जी निज योग निवास सुनरख जो कि ब्रजक्षेत्र में पड़ता है । उसी की छाप सौभरि जी के वंशजों पर भी है । हर व्यक्ति पर जिस क्षेत्र में रहता है उसका प्रभाव उसकी भाषा, संस्कृति पर पड़ता ही है ।
ओमन सौभरि भुर्रक, भरनाकलां, मथुरा
संबंधित लिंक...
सौभरि जी बारे में और जानने के लिए क्लिक करें
श्री प्रभुदत्त ब्रह्मचारी जी
ब्रजराज बलदाऊ मन्दिर के संस्थापक श्री कल्याणदेवचार्य
माँ सती हरदेवी पलसों
श्री बलदाऊ जी मन्दिर, बल्देव, मथुरा
सौभरि ब्राह्मण समाज के गोत्र, उपगोत्र व गांवों के नाम के बारे में जानिए ।
श्री प्रभुदत्त ब्रह्मचारी जी
ब्रजराज बलदाऊ मन्दिर के संस्थापक श्री कल्याणदेवचार्य
माँ सती हरदेवी पलसों
श्री बलदाऊ जी मन्दिर, बल्देव, मथुरा
सौभरि ब्राह्मण समाज के गोत्र, उपगोत्र व गांवों के नाम के बारे में जानिए ।
संबंधित लिंक...
साभार:- ब्रजवासी
ब्रजभूमि का सबसे बड़ा वन महर्षि 'सौभरि वन'
आऔ ब्रज, ब्रजभाषा, ब्रज की संस्कृति कू बचामें
ब्रजभाषा लोकगीत व चुटकुले, ठट्ठे - हांसी
-----------------------------------------------------------------
No comments:
Post a Comment